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श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी आगरा नगर के वस्त्र व्यवसायियों का संगठन है जिसकी स्थापना सन् 1885 में हुई थी। कमेटी विगत 128 वर्षों से विभिन्न क्षेत्रों में नगर की सेवा कर रही है। कमेटी ने अपने सेवा प्रकल्पों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। नगर में आज श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी व निःस्वार्थ सेवा दोनों एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं।
कमेटी के सेवा प्रकल्पों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण सेवा प्रकल्प है डायलिसिस सेवा प्रकल्प। किडनी के मरीजों को जीवन पर्यन्त एक नियमित अन्तराल पर डायलिसिस करानी होती है। जिसका खर्चा प्रति डायलिसिस 2500 से 3000 रूपये तक होता है। वहीं कमेटी द्वारा यह सेवा मात्र 500 रूपये प्रति डायलिसिस की नाम मात्र राशि पर की जाती है। यह सेवा उत्तर भारत के प्रख्यात चिकित्सक डा. एन. एल. पटनी स्मृति डायलासिस सेन्टर, खन्दारी आगरा पर संचालित है। कमेटी द्वारा मरीजों हेतु फिच्युएला बनाने की सेवा भी प्रचलित दरों से लगभग एक तिहाई कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही है।
अल्प समय में ही इस डायलिसिस सेन्टर ने चिकित्सा क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बनाई है। वर्तमान में यह सेन्टर आठ मशीनों के साथ शतप्रतिशत क्षमता से कार्य करता हुआ प्रदेश का सर्वाधिक डायलिसिस करने वाला सेन्टर बन चुका है।
श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी द्वारा आगरा के सबसें पुराने प्रतिष्ठित नेत्र चिकित्सालय आगरा बुलियन चैरिटेबिल आई हॉस्पीटल, मोतीलाल नेहरू रोड़, आगरा का संचालन किया जा रहा है। कमेटी द्वारा इसके भवन का पुर्ननिर्माण किया गया है व नेत्र परीक्षण एवं ऑपरेशन की अत्याधुनिक मशीनों की व्यवस्था की गयी है। हॉस्पीटल में अनुभवी व योग्य चिकित्सको की देख रेख में नेत्र परीक्षण के साथ-साथ फिजिशियन ओ.पी.डी. की सुविधा भी है। कमेटी इस नेत्र चिकित्सालय को एक सुपर आई हॉस्पीटल बनाने हेतु कटिवद्ध है।
यह सेवा पिछले कुछ समय में कमेटी की एक महत्वपूर्ण सेवा बनके उभरी है। कई रोगों में अस्पताल से घर आने पर भी मरीजों को व्हील चेयर व मरीजों वाले पंलग की आवश्यकता रहती है। ऐसे मरीजों को व्हीलचेयर व पलंग कमेटी द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराये जाते हैं। मरीजों हेतु बॉकर, पानी व हवा के गद्दे भी उपलब्ध है।
श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी की स्थापना 125 वर्ष पूर्व दीनहीन व असहाय लोगों को भोजन कराने से हुई थी। अपने आरम्भ से आज तक भोजन का यह क्रम एक भी दिन के लिए टूटा नहीं है। यह अपने आप में एक कीर्तिमान है।
कमेटी द्वारा जनता के सहयोग से अपने प्रधान कार्यालय खालसा गली व सह कार्यालय एम.जी. रोड. पर प्रातः 10 बजे तक आने वाले प्रत्येक अतिथि को ससम्मान निःशुल्क ताजा सात्विक भोजन कराया जाता है। इस प्रकल्प में पुण्य के भागी, दानी सज्जनों के योगदान के लिये कमेटी ने निम्न प्रारूप निर्धारित कर रखा है। सामान्य भोजन 300/- विशेष भोजन 600/- सामान्य रूप से दाल, आटा, चावल, तेल, मसाले, सब्जी आदि आवश्यकतानुसार स्वीकार किऐ जाते हैं।
आवश्यकता पड़ने पर मरीजों की सुविधा हेतु कमेटी ने ऑक्सीजन गैस सिलेण्डर व सेक्शन मशीन देने की व्यवस्था अपने यहाँ कर रखी है। यह व्यवस्था कमेटी के दोनों कार्यालय पर है। कमेटी के इस सेवा प्रकल्प के माध्यम से बड़ी संख्या में मरीज लाभ उठाते हैं और सांस व दमा के गम्भीर मरीज अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बच जाते हैं।
कमेटी नगर के अन्दर व बाहर के मरीजों को अस्पताल पहुँचाने व लाने ले जाने के लिए, गम्भीर मरीजों को नगर से दिल्ली आदि जगह ले जाने हेतु एम्बुलेन्स की सुविधा उपलब्ध कराती है। नगर की समाज सेवी संस्थाओं द्वारा ये एम्बुलेन्स संचालन हेतु कमेटी को प्रदान की गयी हैं। कमेटी के पास आवश्यकतानुसार छोटी व बड़ी एम्बुलेन्स उपलब्ध रहती हैं। ए.सी. टाटा विंगर गाड़ी भी इस सेवा में कार्यरत है।
पिछले दो दशक में नगर का तेजी से विस्तार हुआ है। ऐसे में शव को शमशान घाट तक ले जाने हेतु शव वाहन की आवश्यकता होती है। कमेटी के पास विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा प्रदत्त छोटे बड़े कई शव वाहन है जो चौबीसों घण्टे सेवा के लिए उपलब्ध हैं। कमेटी के शव वाहन नगर से बाहर देश के कई प्रमुख नगरों तक शव को ले जाने का कार्य भी कर रहे हैं। इस हेतु कमेटी के पास ए.सी. शववाहन भी उपलध्य है। अपने प्रकार की यह अनूठी सेवा देश के चुनीदाँ शहरों में ही देखने को मिलेगी। आगरा में श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी कुशलता पूर्वक इस सेवा का संचालन कर रही है।
12 दिसम्बर 2004 को श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी ने आकस्मिक दुर्घटना वाहन सेवा के रूप में नगर में एक ऐसी अद्भुत सेवा की शुरुआत की जिसने कमेटी के सेवा प्रकल्पों को एक नया आयाम दिया। इससे पूर्व सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल चिकित्सा न मिलने के कारण असमय मृत्यु का ग्राफ बढ़ा। इस सेवा के जरिए केवल एक फोन काल पर कमेटी का सेवा वाहन दुर्घटना स्थल पर पहुँचकर घायलों को इमरजैन्सी या नजदीकी नर्सिंग होम तक पहुँचाता है। बिगत वर्षों में हजारों की संख्या में घायलों को इस सेवा के माध्यम से असमय मृत्यु से बचाया जा सका है। प्रशासन की और से एक लिखित प्रपत्र भी कमेटी को सौपा गया है कि दुर्घटना के घायलों की सहायता करने वाले किसी भी नागरिक को पुलिस गवाही आदि में परेशान नहीं किया जाऐगा वरन् शासन की ओर से ऐसे नागरिकों को पुरस्कृत किया जाऐगा। इस वाहन पर पुलिस व वायरलैस की भी व्यवस्था है।
यह कमेटी के प्रयासों को परिणाम है कि अब नागरिक भी बेझिझक घायलों को स्वयं नजदीकी चिकित्सा स्थल पर पहुँचाते हैं और सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु का ग्राफ भी गिरा है। इस सेवा में नगर के प्रशासन, सरकारी चिकित्सा संस्थान व विभिन्न नर्सिंग होम भी अपना सहयोग देते हैं।
मृत व्यक्ति के निकटस्थ परिजनों के अन्यत्र होने की स्थिति में परिजनों के आने तक शव को सुरक्षित रखना एक बड़ी समस्या थी। कमेटी के सेवा प्रकल्प वातानुकूलित शव शैया ने नगर की इस समस्या को खत्म कर दिया। इस शव शैया के माध्यम से मृत शरीर को 72 घन्टे बिना बर्फ के सुरक्षित रखा जा सकता है। कमेटी के पास विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा प्रदत्त कई शव शैया हैं जो नगर की सेवा में कार्यरत हैं। कमेटी इस वातानुकूलित शव शैया को अपने संसाधन से आवश्यक स्थल पर पहुँचाती है और अपने साधन से ही वापिस अपने कार्यालय ले आती है।
यह प्रकल्प कमेटी का अति महत्वपूर्ण प्रकल्प है। ताजगंज मोक्षधाम पर कमेटी द्वारा न्यूनतम दरों पर शवदाह हेतु लकड़ी उपलब्ध कराई जाती है। शवदाह में प्रयोग आने वाली अन्य सामग्री लौद, राल, चीनी आदि सामग्री भी यहाँ पर उपलब्ध रहती है। दाह संस्कार में प्रयोग किए जाने वाली सभी उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराऐ जाते हैं। घटते वनों के चलते इतनी प्रचुर मात्रा में लकड़ी की व्यवस्था मुश्किल भरा कार्य है। लेकिन कमेटी के प्रयासों से यहाँ सदैव पर्याप्त भण्डार रहता है।
हिन्दू शब्दावली में धाम तीर्थ स्थल को कहते हैं। आज श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी के प्रयासों व नगर की जनता के सहयोग से ताजगंज शमशान घाट तीर्थ स्थली के रूप में विकसित हो गया है। मोक्षधाम सौन्दर्याकरण योजना के अन्तर्गत शवदाह हेतु पक्का प्लेटफार्म व ब्रिक्स लगाकर शवदाह स्थल बनाऐ गऐ हैं। आध्यात्मिक ध्यान केन्द्र (सत्संग भवन) बनवाया गया। शवदाह स्थल पर पानी की लाइन, सोडियम लैम्प लगवाऐ गऐ तथा खरन्जे आदि का निर्माण किया गया। इस व्यवस्था के अन्तर्गत कमेटी सम्पूर्ण मोक्षधाम परिसर की देखभाल करती है और सौन्दर्याकरण हेतु तत्पर रहती है।
वर्ष 1997 में आगरा सहित प्रदेश के 12 शहरों में विद्युत शवदाहगृह बनाऐ गऐ थे। प्रशासन के आग्रह पर आगरा का विद्युत शवदाहगृह संचालन हेतु श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी को हस्तांतरित किया गया। कमेटी के प्रयासों के परिणाम स्वरूप ही आज आगरा में प्रदेश का एकमात्र चालू विद्युत शवदाहगृह है। इस प्रक्रिया द्वारा दाह संस्कार में पॉच लकड़ी, घी, चन्दन, धूप, कपूर आदि सभी सामग्री प्रयोग में लाई जा सकती हैं। इसमें कपाल क्रिया व अस्थिफूल एकत्रित करने की उचित व्यवस्था है। इसमें सभी धार्मिक व वैदिक रीतियों का पालन होता है। समय की बचत भी होती है। इसका प्रयोग बढ़ने से प्रति दाह संस्कार पांच कुण्टल लकड़ी अर्थात पांच जीवित वृक्षों को बचाया जा सकता है। कमेटी द्वारा यहा 100 K.V. का जेनरेटर, 7.5 K.V. तीन फेज जेनरेटर, गंगाजल आदि की व्यवस्था भी की गयी।
कमेटी के प्रयासों से विद्युत शवदागृह का प्रयोग धीरे-धीरे निरन्तर बढ़ रहा है। विद्युत शवदाहगृह को बैकुण्ठ धाम नाम दिया गया। आपसे भी बैकुण्ठ धाम प्रयोग करने का आग्रह है। कमेटी ने वर्ष 2012 को विद्युत शवदाहगृह जागरूकता वर्ष के रूप में मनाया है। इस हेतु नगर के सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर इसका प्रचार प्रसार किया जा रहा है। कमेटी के प्रयासों के सुखद परिणाम भी मिल रहे हैं और विद्युत शवदाहगृह की जनस्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है।
कमेटी प्रत्येक समाज की रीति रिवाज के अनुसार मृतक की अन्तिम यात्रा के लिए आवश्यक सामिग्री बाँस, फूस, कपड़ा, घी, राल, कपूर, गुलाबजल, चूँदरी, सुहाग का सामान, दाह संस्कार करने वाले व्यक्ति के जूते, बनियान, अगोछा, आदि सैकड़ों वस्तुएँ न्यूनतम मूल्य पर उपलब्ध कराती है। यह व्यवस्था कमेटी के प्रधान कार्यालय खालसा गली व सह कार्यालय एम. जी. रोड़ से संचालित होती है। कमेटी गरीबों को यह सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराती है। घंटे व घडियाल भी यहाँ उपलब्ध है। कमेटी उठावनी हेतु निःशुल्क फर्श भी उपलब्ध कराती है।
आपके द्वारा किया गया नेत्रदान दो अन्य व्यक्तियों की अंधेरी दुनिया को रोशन करता है। नगर में नेत्रदान को लेकर काफी जागरूकता आयी है। श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी ने आगरा विकास मंच व एस.एन. मेडीकल कॉलेज के नेत्र विभाग के साथ मिलकर नेत्रदान महादान अभियान चला रखा है। इस अभियान के अन्तर्गत बड़ी संख्या में नेत्रदान हो रहा है। मरणोपरान्त नेत्रदान के इच्छुक व्यक्ति कमेटी से सम्पर्क कर सकते हैं।
एस.एन. हास्पीटल आगरा स्थित बजाजा पोस्टमार्टम गृह पब्लिक प्राइवेट पार्टनर शिप का अनूठा उदाहरण है। यहाँ श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी द्वारा नगर की जनता के सहयोग से वातानुकूलित व सुव्यवस्थित पोस्टमार्टम गृह बनवाया गया है। पोस्टमार्टम गृह की दैनिक रखरखाब व्यवस्था भी बजाजा कमेटी करती है। नवीन पोस्टमार्टम गृह पर मेडीकल छात्रों को शवों का पोस्टमार्टम देखने व सीखने की उच्चस्तरीय व्यवस्था है। अपने परिजन के पोस्टमार्टम का दर्द झेल रहे व्यक्ति को यहाँ कोई परेशानी न हो यही कमेटी का ध्येय है। कमेटी द्वारा यहाँ शवों को सुरक्षित रखने के लिए ए.सी. ताबूत भी उपलब्ध कराये गये हैं। यहाँ कमेटी द्वारा कपड़ा व प्लास्टिक की व्यवस्था की जाती है। जो लावारिस शवों हेतु निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है।
स्वास्थ्य मानव जीवन की सर्वश्रेष्ठ पूँजी है। इस सार्थक वाक्य को मन में धारण किये कमेटी ने शास्त्रीय आधार पर कुशल आयुर्वेदिक चिकित्सको की देखरेख में आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से निर्मित औषधियों द्वारा रोगियों के इलाज की सुविधा प्रधान कार्यालय के साथ-साथ महात्मा गांधी रोड स्थित अपने सहकार्यालय पर भी कर रखी है। यह व्यवस्था आयुर्वेदिक जगत में महत्वपूर्ण है। यहाँ 200-250 मरीज रोज दवा लेने आते हैं। पुराने जटिल रोगी भी यहाँ काफी संख्या में स्वास्थ्य लाभ पाते हैं।
नगर की जनता को शादी एवं विभिन्न उत्सवों पर होने वाले कार्यक्रमों के लिए बर्तनों की आवश्यकता होती है। इस भीषण मँहगाई के युग में आम जनता को राहत के लिए कमेटी ने बर्तनों को निःशुल्क देने की प्रचुर व्यवस्था कर रखी है। एक ही दिन में 75 शादियों एवं उत्सवों के लिए बर्तन उपलब्ध कराने में कमेटी सक्षम है। 20-25 हजार व्यक्तियों के कार्यक्रम के लिए एक ही स्थान पर इस प्रकार की बर्तन व्यवस्था कमेटी के पास उपलब्ध है। कमेटी ने यह व्यवस्था अपने दोनों कार्यालय खालसा गली व एम. जी. रोड पर कर रखी है। जनता की आवश्यकता के अनुसार नये-नये बर्तनों का भण्डारण कमेटी तत्परता से करती है।
कमेटी द्वारा अज्ञात मृतकों को पोस्टमार्टम गृह से शमशानघाट तक अपने साधनों से ले जाया जाता है। जहाँ इनका दाह संस्कार निःशुल्क किया जाता है। कमेटी इनका दाह संस्कार कर अस्थि फूल सुरक्षित रखने की समुचित व्यवस्था करती है। जिनको आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध करा दिया जाता है। यह फूल स्टील अलमारी में थाने के नाम दि. व न. के हिसाब से रखे गये हैं। फरवरी 99 में कमेटी ने 502 असहाय व अज्ञात मृतकों के अस्थि फूलों के सम्मुख श्री मद् भागवत एवं सर्वधर्म प्रार्थना कार्यक्रम कराकर विधि विधान पूर्वक बड़ी श्रद्धा के साथ सोरों स्थित गंगा में विसर्जित किया था। फरवरी 2004 में गंगाजी में पूर्ण राजकीय सम्मान से इन अस्थि फूलों को विसर्जित किया गया था। वर्ष 2006 में कमेटी ने वृज चौरासी कोस परिक्रमा कराकर 850 अस्थिफूलों को वृन्दावन में केसी घाट पर विसर्जित किया था। वर्ष 2010 में 1500 अस्थिफूलों का विधिविधान से सोरों में विसर्जन किया गया।
देह दान का अर्थ है मृत्यु के पश्चात अपने शरीर को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए समर्पित करना। यह एक महान दान है, जिससे डॉक्टर बनने वाले छात्र मानव शरीर की संरचना को समझते हैं और बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर पाते हैं।
हमारा उद्देश्य मानव शरीर दान के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा और शोध को बढ़ावा देना है। देह दान के द्वारा हम अपने जीवन के बाद भी समाज की सेवा कर सकते हैं और चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए अमूल्य योगदान दे सकते हैं।
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